तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसमर्पणम्
गौतम और कणाद के आदर्शों से अनुप्राणित एक आदर्श आर्य
पिता के अनुरूप स्वर्णिम महत्वाकांक्षाओं के साथ जिन्होंने
अपने प्रिय पुत्र को 'गुरुकुल' में प्रविष्ट किया
केवल
पञ्चम कक्षा में पढ़ते समय ही 'न्यायदर्शन' का भाषानुवाद
उपहार स्वरूप उनके हाथों में देकर जिन्होंने उसके कोमल
हृदय में दार्शनिक प्रवृत्ति का बीजारोपण किया
और
फिर उस बीज को 'सुधा-सञ्चित' करने के लिए उसकी
स्नेहमयी माता को भी साथ लेकर जो तुरन्त
ही स्वर्ग सिधार गए
उन्हीं
प्रातःस्मरणीय पितृदेव श्री शिवलाल बख्शी महोदय
और
अखण्ड-सौभाग्य-शालिनी माता प्रेमवती देवी
की पुण्य-स्मृति में
उनकी अव्यक्त 'स्नेह-सुधा' से सिञ्चित उस
सङ्कल्प-तरु का यह मधुर फल
सादर समर्पित है।
[ पितृ-अमावास्या सं० २०१० ]