तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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रघुनाथ शिरोमणि
१६००
”
वहां न्यायकी शिक्षा देना
प्रारम्भ किया। इस प्रकार
वे नव्यन्याय की नवद्वी-
पशाखा के प्रवर्तक हैं।
नवद्वीप में वासुदेव
सार्वभौम से नव्यन्याय
की संपूर्ण शिक्षा प्राप्त
कर मिथिला गए और
पक्षधर मिश्र के शिष्य
बने। एक दिन पक्षधर
मिश्र ने किसी बात पर
इनका अपमान कर दिया
तो रात को छिपकर तल-
वार लेकर उनको मारने
के लिए घर पर पहुँचे।
उस समय पक्षधर मिश्र
अपनी पत्नी से रघुनाथ
की विद्वत्ता की प्रशंसा
कर रहे थे जिसे उन्होंने
बाहर से सुन लिया।
और तलवार फेंक कर
गुरु के चरणों पर गिर
पड़े और क्षमा मांगी।
वे एक आँख से काने थे।
१ तत्त्वचिन्तामणि-दीधिति
२ बौद्धधिक्कार-शिरोमणि
३ पदार्थतत्त्वनिरूपण
४ किरणावली-प्रकाश-दीधिति
५ न्यायलीलावती-प्रकाश-दीधिति
६ अवच्छेदकत्वनिरुक्ति
७ खण्डनखण्डखाद्य-दीधिति
८ आख्यातवाद
९ नञ्वाद
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