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सर्वकोश
तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)

Tarkabhasha of Keshavamishra

आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा

DevanagariHindipublished330 पृष्ठ

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पृष्ठ 53

नवद्वीप शाखा
१६००-१८००
[ ५२ ]
सं० | नाम | काल | स्थान | विशेष | ग्रन्थ
१ | वासुदेव सार्वभौम | १५५० | नवद्वीप | नवद्वीप के महेश्वर विशा- |
| | | | रद के पुत्र थे । व्याकरण |
| | | | आदि पढ़ने के बाद लग- |
| | | | भग २५ वर्ष की अवस्था |
| | | | में मिथिला जाकर पक्ष- |
| | | | धर मिश्र के शिष्य बने । |
| | | | मैथिली पण्डित किसी |
| | | | बाहरी व्यक्ति को अपने |
| | | | ग्रन्थों की प्रतिलिपि नहीं |
| | | | करने देते थे । अत एव |
| | | | वासुदेव सार्वभौम ने |
| | | | समस्त तत्त्वचिन्तामणि |
| | | | और कुसुमाञ्जलि को कण्ठ |
| | | | कर लिया वहाँ से शिक्षा |
| | | | समाप्त कर काशी में |
| | | | वेदान्त का अध्ययन कर |
| | | | १६०० में वे नवद्वीप |
| | | | वापिस लौट आए । और |