तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
पृष्ठ 329, कुल 330 में से
संदर्भ में पढ़ें२६४ तर्कभाषा [ उपसंहारः
उपसंहारः
इहात्यन्तमुपयुक्तानां स्वरूपभेदेन भूयो भूयः प्रतिपादनम् । यदनति-
प्रयोजनं तल्लक्षणमदोषाय । एतावतैव बालव्युत्पत्तिसिद्धेः ।
इति श्रीकेशवमिश्रविरचिता तर्कभाषा समाप्ता ।
उपसंहार
यहां [ तर्कभाषा ग्रन्थ ] में अत्यन्त उपयोगी [ हेत्वाभास आदि पदार्थों ]
का स्वरूपभेद से बार बार प्रतिपादन किया गया है। और जो अधिक उपयोगी
नहीं है उसका लक्षण न करना दोषजनक नहीं है। क्योंकि हमने जो कुछ कहा
है ] इतने से ही बालव्युत्पत्ति सिद्ध हो सकती है। [ बालव्युत्पत्ति के लिए ही
ग्रन्थ लिखा था। इसमें जितना विषय वर्णन किया है, बालव्युत्पत्ति के लिए वही
पर्याप्त है। इसलिए जाति, निग्रहस्थान आदि जो अधिक उपयोगी पदार्थ नहीं हैं,
उनका विस्तारपूर्वक वर्णन न करना दोषाधायक नहीं है ] ।
श्रीकेशवमिश्र-विरचित तर्कभाषा समाप्त हुई ।
मासाभ्यां पौषमाघाभ्यां, द्विसहस्रेऽष्टकोत्तरे ।
वैक्रमे, तर्कभाषायाः व्याख्येयं पूर्तिमागता ॥
उत्तरप्रदेशस्थ-'पीलीभीत' मण्डलान्तर्गत-मकतुलग्रामनिवासिनां
श्री शिवलाल-बख्शी-महोदयानां तनुजनुषा
वृन्दावनस्थगुरुकुलविश्वविद्यालयाधीतविद्येन तत्रत्याचार्यपदमधितिष्ठता
एम्० ए० इत्युपपदधारिणा श्रीमदाचार्यविश्वेश्वरसिद्धान्तशिरोमणिना
विरचिता 'तर्करहस्यदीपिका' हिन्दीव्याख्या समाप्ता
समाप्ताश्चायं ग्रन्थः
चौखम्भा संस्कृत संस्थान
पोस्ट बाक्स नं० १३६
जड़ाव भवन, के. ३७/११६, गोपाल मन्दिर लेन
वाराणसी-२२१००१ ( भारत ) फोन : ६४८८६