तर्कभाषा (आचार्य केशवमिश्र - पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि कृत 'तर्करहस्य' हिन्दी व्याख्या सहित)
Tarkabhasha of Keshavamishra
आचार्य केशवमिश्र (व्याख्याकार: पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि) द्वारा
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१९ लिङ्ग का लक्षण ७२
२० परामर्श का लक्षण ७२
३८ उपाधि का निरूपण ७२
२१ औपाधिकसम्बन्ध ७५
२२ परामर्शरूप तृतीयज्ञान की
अपरिहार्यता ७७
२३ अनुमान के दो भेद ७९
२४ स्वार्थानुमान ७९
२५ परार्थानुमान ८०
२६ अन्वय व्यतिरेक व्याप्ति ८१
२७ अन्वयव्यतिरेकी हेतु ८२
२८ केवलव्यतिरेकी हेतु ८३
२९ केवलान्वयी हेतु ८५
३० हेतु के पञ्चरूप ८६
३९ पक्ष, सपक्ष, विपक्ष निरूपण ८६
३१ पक्ष सपक्ष विपक्ष लक्षण ९०
३२ हेत्वाभास ९२
३३ असिद्ध के तीन भेद ९३
३४ विरुद्ध, अनैकान्तिक
प्रकरण ९४
३५ बाधित विषय ९५
४० अनुमान की आवश्यकता ९६
४१ दर्शनमीमांसा संग्रह ४२-४८ श्लोक ९७
४२ अनुमान का लक्षण और भेद ९८
४३ बौद्ध परम्परा में अनुमान के भेद १००
४४ तर्कभाषा में अनुमान के भेद १००
४५ पञ्चावयवों के प्रयोग में भेद १०३
४६ हेतु के पञ्चरूप १०४
४७ दर्शनमीमांसा संग्रह ४९-५८ श्लोक १०१
४८ ” ” ५९ ६१ श्लोक १०२
४९ परार्थानुमान के पञ्चावयव १०२
[उपमाननिरूपण पृ० १०६-१०७]
३६ उपमान का लक्षण १०६
५० उपमान के विषय में सांख्य,
वैशेषिक आदि का न्याय से भेद १०१
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५१ दर्शनमीमांसा संग्रह ६२-६९ श्लोक १०७
[ शब्दनिरूपण पृ० १०८-११४ ]
३७ शब्द का लक्षण १०८
३८ वाक्य का लक्षण १०८
३९ आकांक्षाद १०९
४० पदलक्षण ११०
५२ शब्द के विषय में वैशेषिक मत १११
५३ ” ” प्रभाकर मत ११२
५४ अभिहितान्वयवाद तथा
अन्विताभिधानवाद ११३
५५ दर्शनमीमांसा संग्रह ७०-७१श्लोक ११४
[ अर्थापत्ति निरूपण ११५-११६ ]
४१ अर्थापत्ति का लक्षण ११५
४२ अनुमान में अन्तर्भाव ११५
५६ दर्शनमीमांसा संग्रह ७२-७८ श्लोक ११६
[ अभाव निरूपण ११६-१२८ ]
४३ अभाव प्रमाण का उपपादन
पूर्वपक्ष ११७
४४ अभाव का प्रत्यक्ष से ग्रहण
सिद्धान्त पक्ष ११७
इन्द्रिय और अभाव का सम्बन्ध
५७ सम्बन्ध का लक्षण ११९
५६ विशेष्यविशेषण भावादि के
सम्बन्धत्व का खण्डन १२२
४७ अभावप्रमाण का खण्डन १२४
५८ उपमान के विषय में सांख्यमत १२५
५९ अभाव के विषय में सांख्यमत १२७
६० अभाव के विषय में वैशेषिक मत १२७
६१ प्रमाण संख्याविषयक मतभेद १२७
६२ दर्शनमीमांसा संग्रह ७९-८० श्लोक १२८
[प्रामाण्यवाद निरूपण १२८-१४४]
६३ प्रामाण्यवाद के विषय में विभिन्न
दर्शनों के मत १२९