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तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)

तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)

Tantrasara of Mahamaheshvara Abhinavagupta with Commentary

महामाहेश्वर अभिनवगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished294 पृष्ठ

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पृष्ठ 186

आ. १० ] तन्त्रसार-अभिनवगुप्त [ १०५
मुनितत्त्वार्णं द्विकपदमन्त्रं वस्वक्षिभुवनमपरकला ।
अग्न्यर्णतत्त्वमेककपदमन्त्रं सैन्यभुवनमिति तुर्या ॥२॥
षोडश वर्णाः पदमन्त्रतत्त्वमेकं च शान्त्यतीतेयम् ।
अभिनवगुप्तेनार्यत्रियमुक्तं संग्रहाय शिष्येभ्यः ॥३॥
भुवनजालसअलउ परिसरसहअवसीसइतत्ताहंसकूउ ।
तत्तभाउकलणा इविमरिसहसीसइपञ्चकलाहंसरूउ ॥
पञ्चकलामउएहु महेसरकुण्डइविउज्जइ । -
इच्छइसुहमउ भरिहिविबोधतरङ्गमहासह ॥
सोच्चिअभासइ भवतहविसरउ ।
सअलउअद्धजालु निअधअणिपरिमरिमेहहरो ॥
चेअणुभरिअभरिउ अप्पहमणिसच्चिअपाणिमणु ।
माणसपाणधण धीसामसुपूरितजज्जिबणु ॥
तंजिघडाइ निलहु परभइरवगाहहुहोइतणु ।
मत्तिदाणुआवाहणु प्रअणुसणिणहाणुइउ अहिणउउडु ॥
सब्बिबहअद्धकलण निव्वॉहाराएतिलडेचिअएहइतत्त्व ।
इति श्रीमदभिनवगुप्ताचार्यविरचिते तन्त्रसारे कलाद्यध्वप्रकाशनं
नाम दशममाह्निकम् ॥१०॥