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सर्वकोश
ताण्ड्य महाब्राह्मण / पञ्चविंश ब्राह्मण (सायण भाष्य एवं चिन्नस्वामी शास्त्री टीका सहित)

ताण्ड्य महाब्राह्मण / पञ्चविंश ब्राह्मण (सायण भाष्य एवं चिन्नस्वामी शास्त्री टीका सहित)

Tandya Mahabrahmana with Sayanacharya Commentary

महर्षि ताण्डि (भाष्यकार: श्रीमत् सायणचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished518 पृष्ठ

पृष्ठ 336, कुल 518 में से

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पृष्ठ 336

भवति ॥ ७ ॥

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श्रुतकक्षेण क्षत्रियेण दृष्टं श्रौतकक्षम्। अतः क्षत्रसामैतत्। तत्प्रयोगे-

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ण क्षत्रं प्रबलं भवति ॥ ७ ॥

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अथ मध्यमे पर्याये होतुः साम विदधाति—

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(३)‘अयं त इन्द्र सोम’ इति दैवोदासम् ॥ ८ ॥

Line 22:
दैवोदासं दिवोदासेन दृष्टं साम ॥ ८ ॥

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एतन्निधनद्वारा प्रशंसति—

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अग्निष्टोमेन वै देवा इमं लोकमभ्यजयन्नन्तरिक्षमु-

Line 25:
क्थेनाऽतिरात्रेणाऽमुं, त इमं लोकं पुनरभ्यकामयन्त त इ-

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हेत्यास्मिँल्लोके प्रत्यतिष्ठन् यदेतत्साम भवति प्र-

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तिष्ठित्यै ॥ ९ ॥

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पूर्वे देवा अग्निष्टोमोक्थ्यातिरात्रैः क्रमेण भूरादिलोकत्रयं