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सर्वकोश
तैत्तिरीयोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

तैत्तिरीयोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Taittiriya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished261 पृष्ठ

पृष्ठ 135, कुल 261 में से

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पृष्ठ 135

अनु० २ ] शाङ्करभाष्यार्थ १२९
परिकल्प्यते वचनात् । सर्वत्र | कल्पना किया जाता है । इसके
वचनादेव पक्षादिकल्पना । | सिवा आगे भी श्रुतिके वचनानुसार
व्यानो व्यानवृत्तिर्दक्षिणः पक्षः । | ही पक्ष आदिकी कल्पना की गयी
| है । व्यान अर्थात् व्यान नामकी
अपान उत्तरः पक्षः । आकाश | वृत्ति दक्षिण पक्ष है, अपान उत्तर
| पक्ष है, आकाश आत्मा है। यहाँ
आत्मा । य आकाशस्थो वृत्ति- | प्राण-वृत्तिका अधिकार होनेके कारण
विशेषः समानाख्यः स आत्मेवा- | [ 'आकाश' शब्दसे ] आकाशमें
त्मा; प्राणवृत्त्यधिकारात् । | स्थित जो समानसंज्ञक प्राणकी
| वृत्ति है वही आत्मा है । अपने
मध्यस्थत्वादितराः पर्यन्ता वृत्ती- | आसपासकी अन्य सब वृत्तियोंकी
रपेक्ष्यात्मा । "मध्यं ह्येषामङ्गा- | अपेक्षा मध्यवर्तिनी होनेके कारण
नामात्मा" इति श्रुतिप्रसिद्धं | वह आत्मा है । "इन अंगोंका मध्य
| आत्मा है" इस श्रुतिसे मध्यवर्ती अंग-
मध्यमस्थस्यात्मत्वम् । | का आत्मत्व प्रसिद्ध ही है ।
पृथिवी पुच्छं प्रतिष्ठा । | पृथिवी पुच्छ-प्रतिष्ठा है। 'पृथिवी'
पृथिवीति पृथिवीदेवताध्यात्म- | इस शब्दसे पृथिवीकी अधिष्ठात्री
कस्य प्राणस्य धारयित्री स्थिति- | देवी समझनी चाहिये; क्योंकि
| स्थितिकी हेतुभूत होनेसे वही
हेतुत्वात् । "सैषा पुरुषस्यापान- | आध्यात्मिक प्राणको भी धारण
मवष्टभ्य" (प्र० उ० ३।८) इति हि | करनेवाली है । इस विषयमें "वह
| पृथिवी-देवता पुरुषके अपानको
श्रुत्यन्तरम् । अन्यथोदानवृत्त्यो- | आश्रय करके" इत्यादि एक दूसरी
र्ध्वगमनं गुरुत्वाच्च पतनं वा | श्रुति भी है । अन्यथा प्राणकी
| उदानवृत्तिसे या तो शरीर ऊपरको
स्याच्छरीरस्य। तस्मात्पृथिवी देवता | उड़ जाता अथवा गुरुतावश गिर
पुच्छं प्रतिष्ठा प्राणमयस्यात्मनः । | पड़ता । अतः पृथिवी-देवता ही
| प्राणमय शरीरकी पुच्छ-प्रतिष्ठा है ।
तत्तस्मिन्नेवार्थे प्राणमयात्मविषय | उसी अर्थमें अर्थात् प्राणमय आत्माके
एष श्लोको भवति ॥ १ ॥ | विषयमें ही यह श्लोक प्रसिद्ध है ॥१॥
इति ब्रह्मानन्दवल्ल्यां द्वितीयोऽनुवाकः ॥ २ ॥
तै० उ० १७-१८-
CC-0 Pt. Chakradhar Joshi and Sons, Dev Prayag. Digitized by eGangotri