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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

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पृष्ठ 867

८६८ परिशिष्टत्वेन संगृहीतः- [ अनु० ५२-५३ ]
रीरिषो मा हिंसय । तदर्थं त्वा त्वां हविषा हविष्प्रदानैर्विधेम परिचरेम । त्वा
कथंभूतम् । नॄन्प्राणिनश्चष्टे पुण्यपापपरीक्षायै पश्यतीति नृचक्षास्तं नृचक्षसम् ॥
· इति कृष्णयजुर्वेदीयतैत्तिरीयारण्यके दशमप्रपाठके नारायणीयापरनामधेययुक्तायां
याज्ञिक्यामुपनिषदि भाष्य एकपञ्चाशोऽनुवाकः ॥ ५१ ॥

अथ द्विपञ्चाशोऽनुवाकः ।
मा नो॑ म॒हान्त॑मु॒त मा नो॑ अर्भ॒कं मा न॒ उक्ष॑न्तमु॒त मा न॑ उक्षि॒तम् ।
मा नो॑ वधीः पि॒तरं॒ मोत मा॒तरं॑ प्रि॒या मा न॑स्त॒नुवो॑ रुद्र रीरिषः ॥
इति कृष्णयजुर्वेदी तैत्तिरीयारण्यकदशमप्रपाठके नारायणोपनिषदि १
द्विपञ्चाशोऽनुवाक