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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 83, कुल 914 में से

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पृष्ठ 83

तत्तिरी॑यारण्यके प्रथमप्रपाठके" (wait, तत्तिरीयारण्यके or तैत्तिरीयारण्यके? It says "तत्तिरीयारण्यके" or "तैत्तिरीयारण्यके"? Let's look closely: "तैत्तिरीयारण्यके", there are two matras on त! तैत्तिरीयारण्यके)
"इति कृष्णयजुर्वेदीयतैत्तिरीयारण्यके प्रथमप्रपाठके"

Line 21:
"एकविंशोऽनुवाकः ॥ २१ ॥"

Line 22:
"अत्र केतव इति मन्त्रं विहायान्येऽष्टौ मन्त्राः प्रथमानुवाके व्याख्याताः । पुनरप्युप-"

Line 23:
"धानार्थे मन्त्रपाठः । केत्वरुणवातरशनशब्दा ऋषिसंघानाचक्षते । ते सर्वेऽपि ऋषिसंघाः"
(Wait: "केत्वरुण..." or "केत्वरुणवातरशनशब्दा"? Look at line 23:
"केत्वरुणवातरशनशब्दा" -> wait, 'केतवरुणवातरशनशब्दा' or 'केत्वरुण'?
Wait: के, त्, व? Let's zoom in on line 23:
के - त - व - रु - ण ? No, के - त् - व - रु - ण ?
Look at 'के