तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)
Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary
कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतत्तिरी॑यारण्यके प्रथमप्रपाठके" (wait, तत्तिरीयारण्यके or तैत्तिरीयारण्यके? It says "तत्तिरीयारण्यके" or "तैत्तिरीयारण्यके"? Let's look closely: "तैत्तिरीयारण्यके", there are two matras on त! तैत्तिरीयारण्यके)
"इति कृष्णयजुर्वेदीयतैत्तिरीयारण्यके प्रथमप्रपाठके"
Line 21:
"एकविंशोऽनुवाकः ॥ २१ ॥"
Line 22:
"अत्र केतव इति मन्त्रं विहायान्येऽष्टौ मन्त्राः प्रथमानुवाके व्याख्याताः । पुनरप्युप-"
Line 23:
"धानार्थे मन्त्रपाठः । केत्वरुणवातरशनशब्दा ऋषिसंघानाचक्षते । ते सर्वेऽपि ऋषिसंघाः"
(Wait: "केत्वरुण..." or "केत्वरुणवातरशनशब्दा"? Look at line 23:
"केत्वरुणवातरशनशब्दा" -> wait, 'केतवरुणवातरशनशब्दा' or 'केत्वरुण'?
Wait: के, त्, व? Let's zoom in on line 23:
के - त - व - रु - ण ? No, के - त् - व - रु - ण ?
Look at 'के