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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

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पृष्ठ 688

: Wait! क्षिhas the retroflex loop? Wait, let's look atकानिचिद्विधत्ते(L17),रक्षणम्(L18),परिरक्षणम्(L20),विवक्षिताः(L21),क्षत्रियस्य(L21). Look atक्षिinविवक्षिताः(line 21): It isक्षwithि: क्षि. Now look at the word in line 25: स म न्ता त्thenक्षि प्य मा नाः! The character is IDENTICAL to क्षिinविवक्षिताः! Yes, it is literally क्षिप्यमानाः! Wait, why समन्तात्क्षिप्यमानाः? Wait, आ + क्षिप्यमानाः? Look at the preceding words: सम्यगा समन्तात् क्षिप्यमानाः->सम्यगासमन्तात्? There is a space: सम्यगा समन्तात्क्षिप्यमानाः! Wait, could it be सम्यगा समन्तात् क्षिप्यमानाः? Wait, आ-समन्तात्orसम्यक् आ समन्तात्? Yes, सम्यगा समन्तात्क्षिप्यमानाः क्रियाः समाज्ञाः ।