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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

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पृष्ठ 645

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Wait, look at the letters in line 31:
"°द्भवस्तं ° ।" -> there is 'स' with 'त' conjunct: 'स्तं' with anusvara: 'स्तं'!
Yes, "°द्भवस्तं ° ।"

Let's check line 1:
"तपरित्यागश्चेतिदोषचतुष्टयं पुरोक्तद्वैधवाक्यकोटौ । तथा भावीवाक्यकोट्यामपि दोषच-"
Wait, "भावीवाक्यकोट्यामपि"? Or "भाविवाक्यकोट्यामपि"?
Look at the text: 'भ', 'ा', 'व', 'ी'? There is an ee-kar: "भावीवाक्यकोट्यामपि" (or "भावि-")? It has an ee-kar: "भावीवाक्यकोट्यामपि".

Let's check line 2:
"तुष्टये योजिते सत्यष्टौ दोषाः संपद्यन्ते । तस्मात्समुच्चय एव ग्राह्यो न तु विकल्पः ॥"

Line 3:
"*तृतीयाधिकरणमारचयति—"
Wait, does it have an asterisk? Yes, "*".

Line 4:
" “ यः कोऽप्यनियमेनात्र बुध्यते सुप्त एव वा ।"

Line 5:
"उद्बिन्दोरिवाशक्तेर्नियन्तुं कोऽपि बुध्यते ॥"
Wait, is it "उद्बिन्दोरि