तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)
Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary
कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंन्निति: Look at line 26: वुषी॑ । स॒हस्रा॑क्षरा पर॒मे व्यो॑मन्निति, इति ।Wait, is itव्यो॑मन्निति? Letters: व्यो॑ म न्नि ति , इति ।Wait, look at the underline underव्यो॑मन्निति: There is a horizontal line under मन्नि. That's anudatta on म॒न्निorम॒न्! Let's write व्यो॑म॒न्निति, इति ।orव्यो॑मन्नि॒ति? The line is clearly under मन्नि: व्यो॑म॒न्निति, इति ।`
Line 27:
गौरी शुक्लवर्णा सरस्वती या शब्दब्रह्मात्मिका सा मिमाय मिमीते स्वकीयैः
Line 28:
शब्दैरभिधेयं सर्वं जगत्पारिच्छिनत्ति । किं कुर्वती, सलिलान्युदकजन्यानि सर्वाणि
Wait, in line 28: जगत्पारिच्छिनत्ति or जगत्परिच्छिनत्ति?
Look closely at जगत्परिच्छिनत्ति:
ज ग त् प रि च्छि न त्ति
Wait! Is it पा or `प