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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 914 में से

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न्निति: Look at line 26: वुषी॑ । स॒हस्रा॑क्षरा पर॒मे व्यो॑मन्निति, इति ।Wait, is itव्यो॑मन्निति? Letters: व्यो॑ म न्नि ति , इति ।Wait, look at the underline underव्यो॑मन्निति: There is a horizontal line under मन्नि. That's anudatta on म॒न्निorम॒न्! Let's write व्यो॑म॒न्निति, इति ।orव्यो॑मन्नि॒ति? The line is clearly under मन्नि: व्यो॑म॒न्निति, इति ।`

Line 27:
गौरी शुक्लवर्णा सरस्वती या शब्दब्रह्मात्मिका सा मिमाय मिमीते स्वकीयैः
Line 28:
शब्दैरभिधेयं सर्वं जगत्पारिच्छिनत्ति । किं कुर्वती, सलिलान्युदकजन्यानि सर्वाणि
Wait, in line 28: जगत्पारिच्छिनत्ति or जगत्परिच्छिनत्ति?
Look closely at जगत्परिच्छिनत्ति:
ज ग त् प रि च्छि न त्ति
Wait! Is it पा or `प