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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

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पृष्ठ 410

अघृ॑णिः सर्व॑वीरोऽ-(wait, स्व॒स्ति॒दा: स्व॒स्ति॒दा) L5:प्रयु॑च्छन्पुर ए॑तु प्रवि॒द्वान् ( १ ) ।L6:कल्पः—“ अथैनमाददत आदीीयमानमनुमन्त्रयते—पूषेमा आशा अनुवेद सर्वाः(wait, आदीीयमान or आदीयमान? It's आदीयमानमनुमन्त्रयते) L7:सो अस्मा५ अभयतमेन नेषत् । स्वस्तिदा अघृणिः सर्ववीरोऽप्रयुच्छन्पुर एतु प्रवि-(or। अस्मा५? The text clearly has सो अस्मा५, but 'स' is partially cut. Writing सो अस्मा५or। अस्मा५? If we look at L8, it is द्वानित्यर्धमस्याध्वनोvsानित्यर्धमस्याध्वनो). Wait! If someone asks for transcription, what do they expect? If a letter is partially clipped by the camera/gutter (e.g. आशा, मार्गेण, ग्रही, प्रमादमकुर्वन्orअकुर्वन्, सविता दधात्विति, लयितुमिच्छति, पुण्यलोके, देवस्तत्र, वा कृष्णाक्षीं, अनु०), if you output ाशा, र्गेण,