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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 296, कुल 914 में से

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पृष्ठ 296

। दशमे तदङ्गद्रव्यशेषेणाग्निहोत्रहो-
[मः क्रि]यते । तत्राऽऽदौ किंचिदनुमन्त्रणमुच्यते ।"
Wait, let's look at what is visible in line 24:
At the very left edge, there is ...ियते or [मः क्रि]यते.
Let's see: [मः क्रि]यते or [क्रि]यते or ियते.

Wait, what about line 25?
Line 25 starts with:
तेप्रख्याता?
Wait, in line 24: कल्पः--“उपर्याहवनीये धार्य-
Note footnote 3 on धार्य-:
३ ग. °ये धार्यं° ।
Then line 25:
तेप्रख्याता? No, if line 24 ends with धार्य-, line 25 must be:
[माणे] प्रख्याता?
Look at line 25:
[माणे] प्रख्याताच्छृतदध्ना!
Wait, look at the image at the start of line 25:
What is the first word of line 25?
In the image:
तेप्रख्याता?
Wait, look at the letters:
ते? No, it's माणे?
Wait, line 2