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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 295, कुल 914 में से

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पृष्ठ 295

"
Ah! Footnote 5 is indeed attached to "दत्तवत्यौ" or "प्राठ्यं"!
Wait, look at line 18: "हेतुं तं प्राठ्यं [प्रवर्ग्यद्रव्यं?]"
Wait, where is the marker '५'?
Ah, footnote 5: "५ ग. ॰त्यौ । प्राठ्यं प्र॰ ।"
It says that manuscript 'ग' has "॰त्यौ । प्राठ्यं प्र॰" instead of something.

Let's read lines 17-26 very carefully:
द्रव्यमपातं युवां पीतवन्तौ । द्यावापृथिव्यौ च युवयोरनुमतिं दत्तवत्यौ । प्रकृष्टरस-
हेतुं तं प्राठ्यं [प्रवर्ग्यद्रव्यं?] यथावद् स्विष्टकृद्देवतायै यथावद्दत्तवानस्मि । द्यावा-
पृथिव्योः प्रसादादस्य कर्मणो निष्पत्तेस्ताभ्यां नमोऽस्तु । हेऽश्वीन्द्ररूप प्रवर्ग्यदेव
Wait, is there a danda after प्रवर्ग्यदेव?
No, line 19 ends with: "प्रवर्ग्यदे-"
Wait! Look at the end of line 19:
"प्रवर्ग्यदे-" with a hyphen/dash, or just "प्रवर्ग्यदे"?
Yes, it's split across lines: "प्र