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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

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य॒मनामकाय? यमनामकाय! "यमाय त्वा" -> यमनामकाय!
And in L17: "विभादिभिर्युक्ताय" or "ऋभुमते"? In mantra L11: "त्वर्जुमते विभुमते प्रभुमते वाजवते" -> wait, does it say "ऋभुमते" in the mantra?
Look at L11: "स॒वि॒त्रे त्व॑र्जुम॑ते" -> wait, is that "त्वर्जुमते" or "त्वृभुमते"?
Look at L11: त्व followed by ॠ / र्जु:
Wait! In Taittiriya Aranyaka 4.9:
"सवित्रे त्वर्जुमते" or "सवित्रे त्वृभुमते"?
The mantra in Taittiriya Aranyaka 4.9.1 is:
"सवित्रे त्वर्जुमते विभुमते प्रभुमते वाजवते स्वाहा" (or त्वृभुमते).
Here it is printed: "त्व॑र्जुम॑ते" (or त्व॑र्भुम॑ते / त्वृभुमते).
And in L17, before "-म्भादिभिर्युक्ताय", maybe "ऋजुत्वादि..." or "ऋभ्वादिभिर्युक्ताय"?
It looks like "[ऋ]भादिभिर्युक्ताय" or "[वि]भादिभिर्युक्ताय" or "म्भादिभि