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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 258, कुल 914 में से

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पृष्ठ 258

second कदाचित्). Exactly!

Footnote 2:
वृक्षं² प्रति प्राविशत् -> २ ग. ˚क्षं प्रा˚ । (manuscript ग has variant). Exactly!

Footnote 1:
Where is footnote 1?
Look at line 4:
...प्रागग्रान्षट्परिधीन्¹परिदधाति ।
Wait, footnote 1 says: १ क. ख. एवं ।
Wait, in line 3-4:
एवं त्रिभिर्मन्त्रैर्विषमसं-
ख्योपेतैरध्वर्युर्दिग्द्वये प्रागग्रान्षट्परिधीन्¹परिदधाति ।
Wait, where is १ in line 4?
Look at line 4: above न् in परिधीन् there is a little superscript १!
Yes, exactly above न्!

Everything matches the printed page precisely.[प्रपा० ४ अनु० ५] कृष्णयजुर्वेदीयं तैत्तिरीयारण्यकम् । २५५
पश्चिमदिग्वर्ती वा त्वं प्रमा आसि प्रकर्षेण मातुं समर्थोऽसि । तृतीयपञ्चममन्त्रौ प्रथ-
ममन्त्रवद्व्याख्येयौ । चतुर्थषष्ठमन्त्रौ द्वितीयमन्त्रवद्व्याख्येयौ । एवं त्रिभिर्मन्त्रैर्विष