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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

पृष्ठ 207, कुल 914 में से

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पृष्ठ 207

).
संद॒धे: सं has no accent, द॒ has anudatta, धे has no accent.
ब्रह्म॑णै॒षः: ब्र has no accent, ह्म॑ has udatta, णै॒ has anudatta, षः has no accent.
।

Line 22:
रम॑ते॒ तस्मि॑न्नुत॒ जीर्णे॒ शया॑ने । नैनं॑ जहात्यह॑स्सु पू॒र्व्ये॑षु, इति ।
Wait, let's re-verify:
"रम॑ते॒" -> र, म॑ (udatta), ते॒ (anudatta).
"तस्मि॑न्नुत॒" -> त, स्मि॑ (udatta), न्न, ुत॒ (anudatta under त॒).
"जीर्णे॒" -> जी, र्णे॒ (anudatta under णे).
"शया॑ने" -> श, या॑ (udatta), ने.
।
"नैनं॑" -> नै, नं॑ (udatta).
"जहात्यह॑स्सु" -> ज, हा, त्य, ह॑ (udatta), स्सु.
"पू॒र्व्ये॑षु" -> पू॒ (anudatta), र्व्ये॑ (udatta), षु.
, इति ।

Lines 23-27:
यतो यस्मात्कारणादयं प्राण आबभूवाऽ