तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)
Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary
कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंिपतो नोऽस्माञ्शपात्प्रत्यधिक्षिपत्ति तस्मै तदर्थं तस्मिन्नवस्थापयितुमुषाश्चWait, let's re-read line 14: "शपतोऽधिक्षिपतो नोऽस्माञ्शपात्प्रत्यधिक्षिपत्ति" or "प्रत्यधिक्षिपत्ति"? Look at: "प्रत्यधिक्षिपत्ति" vs "प्रत्यधिक्षिपन्"? Wait: "शपतोऽधिक्षिपतो नोऽस्माञ्शपात्प्रत्यधिक्षिपत्ति" -> wait, look at the letters: प्र - त्य - धि - क्षि - प - ति -> "प्रत्यधिक्षिपत्ति"? No, it's "प्रत्यधिक्षिपत्ति" or "प्रत्यधिक्षिपन्"? Wait: प्र त्य धि क्षि प ति: Look at line 14:शपतोऽधिक्षिपतो नोऽस्माञ्शपात्प्रत्यधिक्षिपत्ति? No, wait, look at 'प्रत्यधिक्षिप': प्र - त्य - धि - क्षि - प - ति: Wait, after प, is it ति? Look at: प्रत्यधिक्षिपत्ति`? Wait, is there a double त: त्ति?
Look at 'शपति' in L13: श - प - ति.
In L14: प्र - त्य - धि - क्षि - प - ति. It's just