तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)
Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary
कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा
DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ
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इति श्रीमत्सायणाचार्यविरचिते माधवीये वेदार्थप्रकाशे कृष्णयजुर्वेदीय-
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तैत्तिरीयारण्यकभाष्ये प्रथमप्रपाठके सप्तविंशोऽनुवाकः ॥ २७ ॥
Line 13 (section header):
अथ प्रथमेऽष्टाविंशोऽनुवाकः ।
Line 14:
कल्पः—‘ विशीर्णीमिति द्वे ’ इति । तत्र प्रथमामाह—
Line 15 (mantra):
वि॒शी॒र्णी गृ॑ध्रशी॒र्णी च॑ । अपे॑तो निर्ऋ॑तिँ॒ हथः॑ ।
Wait, there's footnote marker २ after हथः॑: हथः॑² ।
Let's check: yes, there is a small २ right after हथः॑!
Line 16 (mantra):
`प॒रि॒बा॒धः श्वे॑तकु॒क्षम् । नि॒ज॒ङ्गꣳ श॑वलो॒दर॑