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सर्वकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

तैत्तिरीय आरण्यक (सायण भाष्य एवं भट्टभास्कर भाष्य सहित सम्पूर्ण प्रथम भाग)

Taittiriya Aranyaka with Sayanacharya Commentary

कृष्ण यजुर्वेदीय महर्षि मण्डल (भाष्यकार: श्रीमत् सायणाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished914 पृष्ठ

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पृष्ठ 105

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१०२ श्रीमत्सायणाचार्यविरचितभाष्यसमेतम्— [प्रपा० १ अनु० २७]

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Line 1:
यजमान जन्मोपेत मा मुहुराप्लवस्व पुनः पुनर्जन्मलक्षणमागमनं मा कुरु मुहुर्मा ऽप्लु-
Wait, is it "यजमान जन्मोपेत" or "यजमान जन्म..."?
Wait, in line 1:
"यजमान जन्मोपेत मा मुहुराप्लवस्व पुनः पुनर्जन्मलक्षणमागमनं मा कुरु मुहुर्मा ऽप्लु-"
Wait, is there an avagraha in "ऽप्लु-"? Yes: "ऽप्लु-".

Line 2:
"वस्व पुनः पुनर्मरणलक्षणं प्रप्लवनं मा कुरु । मा मुहुराण्डी भव आण्डो ब्रह्माण्डम-"

Line 3:
"ध्य. ( भव ) इत्यर्थः । आण्डीत्यभूततद्भाव उच्यते । पूर्वमनाण्ड इदानीमाण्डीभव त-"
Wait, look at footnote 5:
५ ख. ग. भवति ।
Where does footnote 5 attach?
Look at line 3: ध्य. ( भव ) इत्यर्थः ।