सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

Devanagarihipublished94 पृष्ठ

पृष्ठ 82, कुल 94 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 82

विज्ञान)

(८१)

(स्वरोदय विज्ञान)

जैसों बल अपने तन पावै, सो तैंसों वह भार उठावै।
जेतो साधन सों मन लावै, ते तौ लाभ दास हूं पावै।
बोले शंकर सुनो भवानी, यह साधन की गति जु बखानी।
जोगी सावधान जो साथै, ब्रह्म लीन होइ लाइ समाधै।
चालीस दिन बितीत जब होई, अलख चिन्ह पुनि देखै सोई।
यामैं कछु संदेह न जानों, जो हम कहौ साचु करि मानौं।

पार्वत्युवाच

गौरी कहै सुनों जगदीसा, हंसासन साथै जु गुनीनों।
ताकौ भेद नहीं हम जानों, मो पर होइ कृपाल बखानौ।

अथ हंसानन-विधि

श्री शिव उवाच

सिर अरु पृष्ठ कटिहि सम राखै, पिडुरी पर पिडुरी गुरु भाखै।
बाये पग की ऐडी जोई, दक्षिण जानु राखियै सोई।
दक्खिन जानु सु बाँई जानौ, बहुरौ नाम जपौ मन मानौ।
निर्गम स्वर सो हंस कहावै, नाम जु हंस प्रवेस जु पावै।
हंस जु आतम करि पहिचानौ, जो सुहंस परमाल्मा मानौ।
जो इनि दुहुनि एक करि राखै, नाम निरंजन सो रस चाखै।
लहै निरंजन अनुभव जागै, व्याधि मलिनता जड़िता भागै।
जो इहि भांति साधि चित्त लाबै, परम हंस की पदवी पावै।

इति हंसानन

पार्वत्युवाच

सुनिये शब्द अनाहद कैसैं, शिवा कही जब सिव सों ऐसैं।