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सर्वकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

(७) (७)

धरै कुंभकी सक्ति जाकी तहां लौं ।
इडा नांडि का रेचकौ जानि कीजै ।
बढ़ै आयु निश्चै बहुत काल जीजै ।
जहाँ भूकुटी में मनै थाभि राखै ।
लगावै तहाँ टकटकी ईस भाषै ।
बढ़ै आयु ताकी प्रति दौस मानौ ।
घटी तीनो संकर बखानी सु मानौ ।
सुजाना जु पद्मासनै जानि बाधै ।
पवन मूल कौ सो तबै ऊर्ध साधै ।
तहां नासिका पवन कौ पूर ज्ञानी ।
इडा पिंगला कौ तलै जानि आनी ।
अर्ध औ उर्ध द्वै बखानी जहां जू ।
सबै बीच में सुषमना सो तहाँ जू ।
गुरु ज्ञान लैकै करै जोग रीतै ।
अमर होइ जोगी सोई काल जीतै ।
दसम द्वार माँही सबै पूर्ण धावै ।
कमल नाभि ते सक्ति ऊंची उठावै ।
दोहू में जवै होइ संजोग नीकौ ।
अभी दृष्टि होई जो सुखकार जी कौ ।
गिरे अंग पै सो अमर होई प्रानी ।
हिंये राखि ता कौ जु संकर बखानी ।
सदां जुक्ति ऐसी करै जो सु ज्ञानी ।
हरै काल चीन्है प्रथम जो सु ज्ञानी ।
हरै काल चीन्है प्रथम जो बखानी ।
ससी सूर्य जौनों, निसा में प्रवाहै ।
सदा भ्यास कौ जो क्रिया को निवाहै ।