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सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 187, कुल 838 में से

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पृष्ठ 187

१६४ सूर्य-सिद्धान्त
∵ त (१ - च²) / (१ + च कोज्या स) = त (१ - च कोज्या उ)
अर्थात् (१ - च²) / (१ + च कोज्या स) = १ - च कोज्या उ
वा १ + च कोज्या स = (१ - च²) / (१ - च कोज्या उ)
वा च कोज्या स = (१ - च²) / (१ - च कोज्या उ) - १
= [च (कोज्या उ - च)] / (१ - च कोज्या उ)
∴ कोज्या स = (कोज्या उ - च) / (१ - च कोज्या उ)
∴ १ - कोज्या स = १ - (कोज्या उ - च) / (१ - च कोज्या उ)
= (१ - च कोज्या उ + कोज्या उ + च) / (१ - च कोज्या उ)
और १ + कोज्या स = (१ - च कोज्या उ + कोज्या उ - च) / (१ - च कोज्या उ)
∴ (१ - कोज्या स) / (१ + कोज्या स) = (१ - च कोज्या उ - कोज्या उ + च) / (१ - च कोज्या उ + कोज्या उ - च)
= [(१ - कोज्या उ) (१ + च)] / [(१ + कोज्या उ) (१ - च)]
= [(१ + च) / (१ - च)] × [(१ - कोज्या उ) / (१ + कोज्या उ)]
∴ *स्परे² (स / २) = [(१ + च) / (१ - च)] × स्परे² (उ / २)
अथवा स्परे (स / २) = √[(१ + च) / (१ - च)] × स्परे (उ / २) (३)
यह समीकरण स्पष्ट मंद केन्द्र और उत्केन्द्र के सम्बन्ध प्रकट करता है ।


  • किसी कोण की ज्या को उसकी कोटिज्या से भाग देने पर जो कुछ आता
    है वह उस कोण की स्पर्श रेखा कहलाता है । संक्षेप में किसी कोण म की स्पर्श रेखा
    को स्परे म लिखते हैं ।