सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 186, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्पष्टाधिकार १६३
क्षेत्रफल अ र ग
= -------------------
πत²
परन्तु अ र ग का क्षेत्रफल = क्षेत्रफल अ क ग — क्षेत्रफल र क ग
= त² / २ उ — बगा ✕ कर / २
= त.² उ / २ — त.ज्याउ ✕ त.च / २
= त² / २ (उ — च ज्या उ)
यहाँ च दीर्घ वृत्त की केन्द्र-च्युति (eccentricity) है ।
पहले सिद्ध किया गया है कि
क्षेत्रफल अ र ग / दीर्घवृत्त का क्षेत्रफल = द. भ / २π
∵ द. भ / २π = [ त² / २ (उ — च ज्या उ) ] / πत²
या भ. द = उ — च ज्या उ (१)
यह समीकरण मध्यम मन्द केन्द्र और उत्केन्द्र का सम्बन्ध प्रकट करता है ।
स्पष्ट केन्द्र और उत्केन्द्र का सम्बन्ध स्थापित करना :—
दीर्घवृत्त का ध्रुवीय समीकरण (Polar equation) है,
रग = त (१ — च²) / (१ + च कोज्या स) जहाँ रग, र नाभि से ग ग्रह का अन्तर है । परन्तु
दीर्घवृत्त की परिभाषा के अनुसार,
रग = च ✕ नियामक रेखा (directrix) से ग का अन्तर
= च ✕ ब से नियामक रेखा का अन्तर
= च ✕ (केन्द्र से नियामक रेखा का अन्तर — केन्द्र से ब का अन्तर)
= च ✕ (त / च — बक)
= च ✕ (त / च — त कोज्या उ)
= त — च ✕ त कोज्या उ
∵ कर्ण = त (१ — च कोज्या उ) (२)