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सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Sur Sagar Saar with Hindi Commentary

महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा

DevanagariBrajpublished359 पृष्ठ

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पृष्ठ 244

३८४ सूरसागर सार सटीक
अरे मधुप ! बातें ये ऐसी, क्यों कहि आवतिँ तोह ।
सूर सुवस्ती छाड़ि परम सुख, हमें बतावत खोह ॥५६॥
अर्थ—जानकर पागल मत बनो। तत्व का भजन करने से वैसी (तत्ववत्) हो
जाओगी जैसे पारस पत्थर को स्पर्श करके लोहा सोना हो जाता है। मेरी बात को
सत्य मानो तथा सभी मोह को छोड़ दो। तब तक सब पानी की चुपड़ी है जब तक
द्वैत भाव स्थित है। (गोपियां उत्तर देती हैं) अरे मधुप ऐसी बातें तुमसे कैसे कही जा
रही हैं। तुम सुन्दर निवास तथा परम सुख को छोड़कर हमें कन्दरा में योगासन के
लिए स्थान बता रहे हो ॥५६॥
ऊधौ हरि गुन हम चकडोर ।
गुन सौं ज्यौं भावै त्यौं फेरौ, यहै बात कौ ओर ।
पैँड़ पैँड़ चलियै तो चलियै, ऊबट रपट पाइ ।
चकडोरी की रीति यहै फिरि, गुन हीं सौं लपटाइ ।
सूर सहज गुन ग्रन्थि हमारैं, दई स्याम उर माहिं ।
हरि के हाथ परै तौ छूटै, और जतन कछु नाहिं ॥६०॥
अर्थ—उद्धव हम कृष्ण (के गुण) रूपी डोर के साथ घूमने वाली लट्टू हैं। उस
गुण (डोरी) से जैसे चाहो वैसा फिरा दो, यही इस बात का अन्त है। रास्ते-रास्ते
चलिये तो ठीक है, कुराह चलने से पद छिल जाते हैं। लट्टू का यही गुण है कि
नाचने के बाद वह फिर गुण (डोरी) से ही लिपट जाता है। सूरदास कहते हैं कि
(गोपियां कहती हैं) कृष्ण ने हमारे हृदय में गुण (की डोरी) की सहज-गांठ लगा दी
है। कृष्ण के हाथ मे पड़ने पर ही छूट सकती है और अन्य कोई उपाय नहीं है ॥६०॥
उलटी रीति तिहारी ऊधौ, सुनै सो ऐसी को है ।
अल्प वयस अबला अहीरि सठ, तिनहिं जोग कत सोहै ।
बूची खुभी, आँधरी काजर, नकटी पहिरै बेसरि ।
मुड़ली पटिया पारौ चाहै, कोढ़ी लावै केसरि ।
बहिरी पति सौ मतौ करै तौ, तैसोइ उत्तर पावै ।
सो गति होइ सबै ताकी जो, ग्वारिनि जोग सिखावै ।
सिखई कहत स्याम की बतियाँ, तुमकौं नाहीँ दोष ।
राज काज तुम तैं न सरैगो, काया अपनी पोष ।
जाते भूलि सबै मारग मैं, इहाँ आनि का कहते ।
भली भई सुधि रही सूर, नतु मोह धार मैं बहते ॥६१॥
अर्थ—उद्धव तुम्हारी उल्टी रीति को यहाँ कौन (गोपी) है जो सुन सकती
है। अल्प आयु वाली, बुद्धिहीन, अबला अहीर की स्त्रियों को योग कैसे शोभित होगा।
बूची (कान रहित) को खुभी (कान का आभूषण), अन्धी को काजल तथा नकटी बेसर
पहने (यह ठीक नहीं है)। बाल रहित स्त्री माँग काढ़ना चाहे तथा कोढ़ी केसर का लेप