सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६४ सूरसागर सार सटीक
आलिंगन दै अधर दसत खंडि, कर गहि चिबुक उठावत ।
नासा सौं नासा लै जोरत, नैन नैन परसावत ।
इहिं अंतर प्यारी उर निरख्यौ, झझकि भई तब न्यारी ।
सूर स्याम मोकौं दिखरावत, उर ल्याए धरि प्यारी ॥१२३॥
अर्थ—प्रिय को देखकर प्यारी ने हँस दिया । कृष्ण अंग-अंग देखकर रीझ
गये, हँसकर उन्होने नागरि (राधा) को हृदय से लगा लिया । आलिंगन देकर,
अधरो पर दांतो के चिह्न देकर, हाथ से ठुड्डी पकड़कर उठाते हैं । नाक से नाक
जोड़ते हैं, नेत्र से नेत्र स्पर्श कराते हैं । इसी बीच प्यारी ने वक्ष-स्थल को देखा और
तब झिझककर अलग हो गयी । सूरदास कहते हैं कि मुझे दिखाते हुए कृष्ण ने प्यारी
को पकड़कर हृदय से लगा लिया ॥१२३॥
मान करौ तुम और सवाई ।
कोटि करौ एकै पुनि द्वै हौ, तुम अरु मोहन माई ।
मोहन सो सुनि नाम श्रवनहौँ, मगन भई सुकुमारी ।
मान गयौ, रिस गई तुरतहीँ, लज्जित भई मन भारी ।
धाइ मिली दूतिका कंठ सौं, धन्य-धन्य कहि बानी ।
सूर स्याम बन धाम जानिकै, दरसन कौँ अतुरानी ॥१२४॥
अर्थ—अब तुम सवाया (और अधिक) मान करो । हजारों यत्न करो, तुम और
मोहन अन्ततः एक ही होगे । मोहन का नाम कान से सुनकर सुकुमारी राधा प्रसन्न हो
गयी । मान समाप्त हो गया, तुरन्त ही क्रोध चला गया, मन मे अत्यधिक लज्जित हुई ।
धन्य-धन्य की वाणी कहकर, दौड़कर दूती के गले से लिपट गयी । सूरदास कहते हैं कि
कृष्ण को कुन्ज वन मे जानकर (राधा) दर्शन के लिए आतुर हो गयी ॥१२४॥
चलौ किन मानिनि कुंज-कुटीर ।
तुव बिनु कुँवर कोटि बनिता तजि, सहत मदन की पीर ।
गदगद स्वर संभ्रम अति आतुर, स्रवत सुलोचन नीर ।
क्वासि क्वासि वृषभानु नंदिनी, बिलपत बिपिन अधीर ।
बंसी बिसिष, माल ब्यालावलि, पंचानन पिक कीर ।
मलयज गरल, हुतासन मारुत, साखामृगरिपु चीर ।
हिय मैं हरषि प्रेम अति आतुर, चतुर चली पिय तीर ।
सुनि भयभीत बज्र के पिंजर, सूर सुरति-रनधीर ॥१२५॥
अर्थ—मानिनी कुन्ज-कुटीर क्यों नही चलती । तुम्हारे बिना कृष्ण हजारो स्त्रियो
को छोड़कर काम-पीड़ा सह रहे हैं। गद्गद स्वर तथा भ्रम के साथ आतुर होकर आंखो
से आंसू गिराते हैं । वृषभानु की बेटी (राधा) कहाँ है, कहां है (कहकर) वे वन में
विलाप कर रहे हैं ? (उनके लिए) वंशी वाण, माला सर्प, कोयल तथा तोता सिंह,
मलयज विष, वायु अग्नि, चोर शाखामृग (बन्दर) के शत्रु (कांटा) के समान हो गए