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सर्वकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 99

६० ] ॥ सुन्दर विलास ॥
जोग करै जज्ञ करै, वेद विधि त्याग करै,
जप करै तप करै यू ही आयु खूटि है ।
यम करै नेम करै तीरथ ऊ ब्रत करै,
पुहमि भ्रटन करै वृथा श्वास टूटि है ॥
जीवे को जतन करै मन मैं वासना धरै,
पचि पचि यौ ही मरै काल सिर कूटि है ।
औरऊ अनेक विधि कोटिक उपाइ करैं,
सुन्दर कहत बिनु ज्ञान नहिं छूटि है ॥३॥
बुधि करि हीन रज तम गुन छाइ रह्यौ,
बन बन फिरत उदास होइ घरतै ।
कठिन तपस्या धरि मेघ शीत घाम सहै,
कंद मूल खाइ कोऊ कामना के डरतै ॥
अति ही अज्ञान और बिविध उपाइ करै,
निज रूप भूलि करि बधै जाइ परतै ।
सुन्दर कहत मूंधी ओर दिस देखै मुख,
हाथ- माहि आरसी न- फेरै मूढ करतै ॥४॥
(३) पुहमि-पृथ्वी पर । भ्रटन-भ्रमण, तीर्थयात्रा ।
(४) मूंधी-उलटी । आरसी-दर्पण, काच ।