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सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 50

॥ काल चितावनी को अंग ॥ [ ४१
जौबन कौ मद मातौ गिनत न कोऊ नातौ,
काम बस कामिनी कै हाथ ही बिकानौ है ।
श्रुति ही भयौ बेहाल सूझत न माथै काल,
सुन्दर कहत ऐसो और को दिवानो है ॥२३॥
झूठौ धन झूठौ धाम झूठौ कुल झूठौ काम,
झूठी देह झूठौ नाम धरिकें बुलायौ है ।
झूठौ तात झूठी मात झूठे सुत दारा भ्रात,
झूठी हित मानि मानि झूठौ मन लायौ है ॥
झूठौ लेन झूठौ देन झूठौ मुख बोलै बैन,
झूठै झूठै करि फेन झूठ ही कौ धायौ है ।
झूठ ही मैं एतौ भयौ झूठ ही मैं पचि गयो,
सुन्दर कहत साच कबहुँ न आयौ है ॥२४॥
दीर्घाक्षरी
झूठे हाथी झूठे घोरा झूठे आगै झूठा दौरा,
झूठा बध्या झूठा छोडा झूठा राजा रानी है ।
झूठी काया झूठी माया झूठा झूठे धधा लाया,
झूठा मूवा झूठा जाया झूठी याको वानी है ॥
झूठा सोवै झूठा जागै झूठा झूमै झूठा भाजै,
झूठा पीछे झूठा लागे झूठै झूठी मानी है ।
झूठा लीया झूठा दीया झूठा खाया झूठा पीया,
झूठा सौदा भलै कीया ऐसा झूठा प्रानी है ॥२५॥
(२५) वध्या-बधा हुआ । छोडा-छूटा हुआ ।