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सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 233

२२४ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
फेरि जब कह्यो धन गड्यौ तेरे घर माहि,
खोदन लग्यौ है तब निदिध्यास ठानिये ।
धन निकस्यौ है जब दरिद्र गयौ है तब,
सुन्दर साक्षात्कार नृपति बखानिये ॥३५'
॥ इति आतम अनुभव को अंग सम्पूर्ण ॥