सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
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२२२ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
चकमक ठोके तै चमत्कार होत कछु,
ऐसौ है श्रवन ज्ञान तबही लौ जानिये ।
कफमन लागै जब प्रगटै पावक ज्ञान,
सिलगत जाइ वह मनन बखानिये ॥
वर्धमान भये काठ कर्मनि जरावत है,
वह निदिध्यास ज्ञान ग्रंथनि मैं गानिये ।
सकल प्रपंच यह जारि कै समाइ जात,
सुन्दर कहत वह अनुभै प्रमानिये ॥३०॥
भोजन की बात सुनि मन मैं मुदित होत,
मुख मैं न परै जौ लौ मेलिये न ग्रास है ।
सकल सामग्रो आनि पाक कौ करन लाग्यौ,
मनन करत कब जीमू यह आस है ॥
पाक जब भयौ तब भोजन करन बैठो,
मुख मैं मेलत जाइ उहै निदिध्यास है ।
भोजन परन करि तृपत भयौ है जब,
सुन्दर साक्षानकार अनुभै प्रकास है ॥३१॥
श्रवन करत जब सबसौ उदास होइ,
चित्त एकागर आनि गुरु मुख सुनिये ।
(३०) कफमन-कपास, रूई ।