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सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 129

१२० ] ॥ सुन्दर विलास ॥
सूर उहै मन कौ बमि राखत,
कूर उहै रन माहिं नर्ज है ।
त्याग उहै अनुगग नही कहु,
भाग उहै मन मोह तजै है ॥
तज्ञ उहै निज तत्त्वनि जानत,
यज उहै जगदीश यजै है ।
रत्त उहै सौ रत सुन्दर,
भक्त उहै भगवत भजै है ॥३॥
चाप उहै कसिये रिपु ऊपरि,
दाप उहै दलकारि ही मारै ।
छाप उहै हरि आप दई सिर,
थाप उहै थपि और न धारै ॥
जाप उहै जपिये अजपा नित,
खाप उहै निज खाप विचारै ।
बाप उहै सबकी प्रभु सुन्दर,
पाप हरै अरु ताप निवारै ॥४॥
(३) तज्ञ-तत्त्वज्ञ, ज्ञानी ।
(४) खाप-जाति ।