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सर्वकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 124

॥ पतिव्रता को अंग ॥ [ ११५
जल कौ सनेही मीन विछुरत तजै प्रान,
मनि बिन अहि जैसे जीवत न लहिये ।
स्वाति बूंद के सनेही प्रगट जगत माहि,
एक सीप दूसरौ सु चातक ऊ कहिये ॥
रवि कौ सनेही पुनि कमल सरोवर मैं,
शशि कौ सनेही ऊ चकोर जैसे रहिये ।
तैसै ही सुन्दर एक प्रभु सौं सनेह जोरि,
और कछु देखि काहू ओर नहिं बहिये ॥८॥
॥ इति पतिव्रता को अङ्ग सम्पूर्ण ॥