सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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॥ गुरुदेव कौ अंग ॥ [ ३
ये सब लक्षण हैं जिन माहि सो,
' सुन्दर के उर है गुरु दादू ॥३॥
भौजल में बहि जातहुते जिन,
काढ़ि लिये अपने करि आदू ।
और सदेह मिटाइ दिये सब,
काननि टेर सुनाइ कै नादू ॥
पूरण ब्रह्म प्रकास कियौ पुनि,
छूटि गये सब वाद विवादू ।
ऐसी कृपा जु करी हम ऊपरि
सुन्दर के उर है गुरु दादू ॥४॥
कोउक गोरख कौ गुरु थापत,
कोउक दत्त दिगंबर आदू ।
कोउक कथर कोउ भरत्थर,
कोउ कबीर कौ राषत नादू ॥
कोउ कहै हरदास हमारे जु,
यौँ करि ठानत वाद विवादू ।
और तो सत सबै सिर ऊपरि,
सुन्दर के उर है गुरु दादू ॥५॥
(४) भौजल-भवजल, ससारसागर। काननि टेर
सुनाई-गुरुमंत्र देकर। (५) दत्त--दत्तात्रेय । भरत्थर-
भर्तृहरि ।