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सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 107

६८ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
सुन्दर ज्ञान विना न कहू सुख,
भूलनि की बहु भाति गली है ॥२१॥
कोउक चाहत पुत्र धनादिक,
कोउक चाहत वाझ जनायौ ।
कोऊक चाहत धात रसायन,
कोउक चाहत पारद खायौ ॥
कौउक चाहत जन्त्रनि मन्त्रनि,
कोउक चाहत रोग गमायौ ।
सुन्दर राम विना सब ही भ्रम,
देखहु या जग यौँ डहकायौ ॥२२॥
काहे कौ तू नर भेख बनावत,
काहे कौ तू दस हू दिसि डूलै ।
काहे कौ तू तन कपट करै अति,
काहे कौ तू मुख तै कहि फूलै ॥
काहे कौ और उपाइ करै अब,
आन क्रिया करिके मति भूलै ।
सुन्दर एक भजै भगवत हि,
तौ सुखसागर मैं नित भूलै ॥२३॥
॥ इति चांनक को अंग ॥