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सर्वकोश
सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)

सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)

Sudama Charit of Mahakavi Narottamdas with Commentary

महाकवि नरोत्तमदास द्वारा

DevanagariHindipublished108 पृष्ठ

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पृष्ठ 34

सुदामा-चरित
(मूल पाठ)
(दोहा)
श्रीगनेस सुमिर करौं, उपजै बुद्धि प्रकास ।
सो चरित्र वरनन करी, जातैं दारिद नास ॥१॥
ज्यों गंगा-जल-पान तें, पावत पद निरवान ।
त्यों सिंधुर-मुख-वात तें, मूढ़ होत बुधिवान ॥२॥
कृस्न-मित्र कइ जन्म को, ताको वरनन कीन्ह ।
सुख संपति माया मिलै, सो उपदेश जु दीन्ह ॥३॥
बिप्र सुदामा बसत हो, सदा आपने धाम ।
भीख माँगि भोजन करैं, हिये जपत हरि-नाम ॥४॥
ताकी घरनी पतिब्रता, गहे वेद की रीति ।
सलज सुसील सुबुद्धि अति, पति-सेवा सौं प्रीति ॥५॥
कह्यौ सुदामा एक दिन, ‘कृस्न हमारे मित्र’ ।
करत रहति उपदेश तिय, ऐसो परम-विचित्र ॥६॥
स्त्री
महादानि जिनके हितू, जदु-कुल-कैरव-चंद ।
ते दारिद-संताप तें, रहैं न किमि निरद्वंद ॥७॥
कह्यौ सुदामा ‘बाम ! सुने, वृथा और सब भोग ।
सत्यभजन भगवान को, धर्म-सहित जप-जोग’ ॥८॥