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सर्वकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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पृष्ठ 1479

पन्द्रहवाँ अध्याय 15/204–218 ]
रसोई और भोगगृहका वर्णन :-
पाकपालार दक्षिणे—दुइ भोगालय।
एक घरे शालग्रामेर भोग–सेवा हय॥ 204॥
आर घर महाप्रभुर भिक्षार लागिया।
निभृते करियाछे भट्ट नूतन करिया॥ 205॥
बाह्ये एक द्वार तार, प्रभु प्रवेशिते।
पाकपालार एक द्वार अन्न प्रवेशिते॥ 206॥
अनुवाद—रसोई घरके दाहिनी ओर भोग लगानेके
लिये दो कमरे थे। उनमेंसे एक कमरेमें शालग्राम
भगवान्की भोग-सेवा होती थी। श्रीभट्टाचार्यने महाप्रभुकी
भिक्षाके लिये एकान्तमें दूसरा नया कमरा बनवाया था।
उस कमरेको ऐसे बनाया गया था कि बाहरकी ओर
उसका एक ही द्वार था जो महाप्रभुके प्रवेश करनेके
लिये था। उस कमरेका दूसरा द्वार रसोई घरसे जुड़ा
हुआ था, जहाँसे परिवेशनेके लिये भोजन लाया जाता
था॥ 204–206॥
विचित्र नैवेद्यका वर्णन :-
बत्तिशा-आठिया कलार आङ्गटिया पाते।
तिन-मान तण्डुलेर उभारिल भाते॥ 207॥
पीत-सुगन्धि-घृते अन्न सिक्त कैल।
चारिदिके पाते घृत बहिया चलिल॥ 208॥
केयापत्र-कलाखोला-डोंगा सारि सारि।
चारिदिक धरियाछे नाना व्यञ्जन भरि'॥ 209॥
दशप्रकार शाक, निम्ब-तिक्त-सुखत्-झोल।
मरिचेर झाल, छानाबड़ा, बड़ा, घोल॥ 210॥
दुग्धतुम्बी, दुग्धकुष्माण्ड, बेसर, लाफ्रा।
मोचाघण्ट, मोचाभाजा, विविध शाक्रा॥ 211॥
वृद्धकुष्माण्डबड़ीर व्यञ्जन अपार।
फुलबड़ी-फल-मूल विविध प्रकार॥ 212॥
नव-निम्बपत्र-सह भृष्ट-वार्त्ताकी।
फुलबड़ी, पटोल-भाजा, कुष्माण्ड-मान-चाकी॥ 213॥
भृष्ट-माष-मुद्ग-सूप अमृत निन्दय।
मधुराम्ल, बड़ाम्लादि अम्ल पाँच छय॥ 214॥
मुद्गबड़ा, माषबड़ा, कलाबड़ा, मिष्ट।
क्षीरपुलि, नारिकेल, आर यत पिष्ट॥ 215॥
काँजिबड़ा, दुग्धचिड़ा, दुग्ध-लक्लकी।
आर यत पिठा कैल, कहिते ना शक्ति॥ 216॥
घृत-सिक्त परमान्न, मृत्कुण्डिका भरि'।
चाँपाकला-घनदुग्ध आम्र ताहा धरि॥ 217॥
रसाला-मथित दधि, सन्देश अपार।
गौड़े उत्कले यत भक्ष्येरे प्रकार॥ 218॥
अनुवाद—श्रीसार्वभौम भट्टाचार्यने बत्तिशा-आठिया
केलेके पत्तेपर तीन मान (बारह किलो) चावलको
परोसा। फिर चावलको पीले सुगन्धित घीसे इतना सिक्त
किया कि घी पत्तेसे चारों ओरसे बहने लगा। उन्होंने
नाना प्रकारके व्यञ्जनोंसे भरे केवड़ेके पत्ते और
केलेके तनेसे बने दोनोंको उस पत्तेके चारों ओर
साथ-साथ रखा। उन व्यञ्जनोंमें दस प्रकारके साग,
नीमके कड़वे पत्तोंसे बना सूप जिसे शुक्त कहते हैं,
काली मिर्चका सूप, पनीरका बड़ा और अन्यान्य
वस्तुओंके बने बड़े, मट्ठा, दूधमें पकी हुई लौकी, दूधमें
पका हुआ कद्दू, पिसी सरसों डालकर बनायी गयी
सब्जियाँ, मिश्रित सब्जियाँ, केलेके फूलकी सब्जी, तले
हुए केलेके फूल, मीठा डालकर अनेक प्रकारकी
बनायी गयी सब्जियाँ, पके हुए कद्दू और उड़दकी
दालकी बड़ीसे बने अनेक व्यञ्जन, फुलबड़ी, फल
तथा अनेक प्रकारके कन्द, कोमल नीमकी पत्तियोंके
साथ बैंगनका भाजा, फूलबड़ी, परमलकी भाजी, कच्चे
पेठेकी सब्जी, पेठा और अरबीके टुकड़े करके तलकर
बनायी सब्जी, अमृतको भी परास्त करनेवाला तली हुई
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