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श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished696 पृष्ठ

पृष्ठ 575, कुल 696 में से

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पृष्ठ 575

( ५१३ )
कुर्वन्ति, अन्यथा इन्द्रादि स्मृत्यनुपपत्तेः । न च निर्विशेषा देवता
धियमधिरोहति । तत्र प्रमाणान्तराप्राप्तान्गुणान् स्वयमेव बोध-
यित्वा तैः कर्मं प्ररोचयंति । गुण विशिष्टं वा प्रकाशयंति, प्राप्तां-
श्चानूद्य तैः प्ररोचन प्रकाशने कुर्वन्ति, विरुद्धत्वे तु तद्वाचिभिः
शब्दैरविरुद्धान् गुणान् लक्षयित्वा कुर्वन्ति । कर्मविधेेश्च देवताया
ऐश्वर्यमपेक्षितमेव । कामिनः कर्त्तव्यतया कर्मविधीयमानं स्वयं क्षण
प्रध्वंसि कालांतरभाविनः फलस्य स्वर्गादेः साधकमपेक्षते ।
मंत्र समूह भी, कर्म के विनियुक्त विशेष विशेष विषयों में, कुछ न
कुछ उपकार साधन के लिए ही, कर्मानुष्ठेय अर्थ का प्रतिपादन करते हैं ।
मंत्र समूह देवादिकों के शरीरादि गुणविशेषों का प्रतिपादन करके ही,
उपकारी होते हैं अन्यथा कार्यकाल में इन्द्रादि का स्मरण ही नहीं हो
सकता । निर्विशेष ( शरीरादि विशेषभाव रहित ) केवल शब्दमय देवता,
कभी बुद्ध्यारूढ़ ( स्मृत ) नहीं हो सकते । अन्य प्रमाणों जो गुणवर्णन
पाया जाता है, वह स्वयं उद्बोधक या रुचिवर्द्धक होता है अथवा गुण-
विशिष्ट कर्मविशेष का प्रतिपादक होता है । जो गुण प्रमाणान्तरों में
मिलते हैं, वे सब अनुवाद या पुनरुल्लेख मात्र हैं, जो कि साधकों में,
उत्कट श्रद्धा और कर्म स्वरूप का प्रकाशन करते हैं । ( प्रमाणान्तरों के
साथ ) विरुद्धता उपस्थित होने पर गुणवाचक शब्दों से अविरुद्ध गुण
समूहों को, लक्षित करके प्रतिपादन किया गया है । देवताओं का ऐश्वर्य
या विभूति भी, कर्म सापेक्ष होते हैं । सकाम साधकों द्वारा, कर्त्तव्यरूप
से विधीयमान कर्म, स्वयं क्षणभंगुर होते हैं, वे कालांतर में स्वर्गादिफल
के रूप में, साधक की साधना के अनुसार प्रतिफलित होते हैं ।
मंत्रार्थवादयोश्च-“वायुर्वैक्षेपिष्ठा देवता वायुमेव स्वेन भाग-
धेयेनोपधावति स एवैनं भूतिं गमयति”-“यदनेनहविषाऽशास्ते तद-
श्यात्तद्ध्यात्तदस्मै देवाराधन्ताम्” इत्यादिषु देवताया कर्मणाऽ-
राधितायाः फलदायित्वं तदनुगुणं चैश्वर्यं प्रतीयमानमपेक्षितत्वेन
वाक्यार्थे समन्वीयते ।
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