सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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विषय श्लोक स० पृष्ठ स०
चन्द्र के क्षय वृद्धि में प्राचीन मत में भूल ४४
उपनिषद् प्रमाण से सूर्य आदि का बिम्ब,
कक्षा का मान ४७
चन्द्र कक्षा और बिम्ब का छोटा होना ५५
भूकक्षा का निर्णय ५६
तारा बिम्ब का कारण ५९
शंकु छाया से वृक्ष पर्वत आदि की ऊंचाई ७०
एक शंकु तथा दो शंकु की विधि ७६
पर्वत का दृश्य और अदृश्य भाग ७९
सूर्य चन्द्र की छाया द्वारा घर आदि की ऊंचाई ८०
मेघ की ऊंचाई ८३
पृथ्वी की गोलाई जानने के लिये
शंकु का उपयोग ८६
क्षितिज वृत्त ८७
दृष्टि सीमा के अनुसार पर्वत की दृश्यता ८८
पर्वत पर सूर्य का जल्दी उदय और
देरी से अस्त ९६
उसका व्यावहारिक अर्थ ९८
ग्यारह प्रकार के शंकुओं की दृष्टि सीमा १००
शंकु दृष्टि सीमा का निर्णय १०१
दृष्टि सीमा के शंकु की ऊंचाई १०२
प्राचीन मत से होरा दिन, मास
और वर्ष के पति १०३
सूर्य आदि की दृष्टि सीमा ११४
आकाश कक्षा का मान ११९
उसमें अन्य मतों का खण्डन १२०
वेद पुराण मत का समाधान १२३
स्तुति तथा उपसंहार १२४-१२५
बीसवां प्रकाश – यन्त्र वर्णन ३३९-३५८
यन्त्र की आवश्यकता १
दो प्रकार के गोल यन्त्र २
एक की प्राचीनता तथा दूसरे की नवीनता ३