सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४५२ सिद्धान्त दर्पण
(९६) बौद्ध का १३७ कला पूर्व तथा १२५० कला उत्तर है ।
मञ्जूषिकायां (९७) खकृतेन्दवो (१४०)ऽर्थ
विश्वेन्दवो (११३५)ऽथानुगुले (९८) कृतेन्द्रा (१४४)
सप्ताब्धि सूर्या (१२४७) नवदुर्गके (९९)ऽर्थ
शक्रा (१४५) नगाभ्रेक्षण रूप (१२०७) संख्याः । १३५ ।
(९७) मंजूषा (१४०) कला पूर्व तथा ११३५ कला उत्तर है । (९८) अनुगुल
१४४ कला पूर्व तथा १२४७ कला उत्तर है । (९९) नयागढ़ (नवदुर्ग) १४५ कला
पूर्व तथा १२०७ कला उत्तर है ।
खण्डादिसप्ततनके (१००)ऽङ्गशक्रा (१४६)
नृपाक्षिचन्द्रा (१२१६) अथ तालचेरे (१०१)
षड्जिष्णवो (१४६)ऽष्टेष्व रुणाश्च (१२५८)
पारि द्वीपे (१०२)ऽद्रिशक्रा (१४७) विधुनागरुद्राः (११८१) । १३६ ।
(१००) खण्डपड़ा १४६ कला पूर्व तथा १२१६ कला उत्तर है । (१०१) तालचेर
१४६ कला पूर्व तथा १२५८ कला उत्तर है । (१०२) पारीकुद (१४७) कला पूर्व
तथा ११८१ कला उत्तर है ।
पुरेरणाह्वे (१०३)ऽद्रिकृतेन्दवो (१४७)ऽर्थ
पूर्णाक्षि चन्द्राः (१२०५) वृहदम्बिकायाम् । (१०४)
शैलाब्धि चन्द्राः (१४७) कृतनेत्र सूर्या (१२२४)
ढेकादिनाले (१०५) खशरेन्दवः (१५०) स्युः । १३७ ।
(१०३) रणपुर १४७ कलापूर्व तथा १२०५ कला उत्तर है । (१०४) बड़म्बा १४७
कला पूर्व तथा १२२४ कला उत्तर है । (१०५) ढेकानाल (१५०) कला पूर्व
वसुत्रि सूर्याः (१२३८) शरतद् भुवस्तु (१५५)
कोणार्क (१०६) एवाग्नि नवेश्वराश्च (११९३)
सुनिश्चिता याजपुरे (१०७)ऽष्टबाण ।
चन्द्रा (१५८) महीबाण भुजा धरित्र्यः (१२५१) । १३८ ।
तथा १२३८ कला उत्तर है । (१०६) कोणार्क का १५५ कला पूर्व तथा ११९३
कला उत्तर है । (१०७) याजपुर का (१५८) कला पूर्व तथा १२५१ कला उत्तर है
मयूर भञ्जे (१०८) ऽष्टशरेन्दवो (१५८)ऽर्क
रामेन्दवो (१३१२) नीलगिरौ (१०९) खभूपाः (१६०)
नगाष्टसूर्य (१२८७) इतिसत्सुखार्थम्
नवाधिकं स्थान शतं मयोक्तम् । १३९ ।