सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 543, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ें४४६ सिद्धान्त दर्पण
कृष्णाब्धि संगे (३२) द्विदिशः (१०२) खबाण
॰नन्दा (९५०) अथो राय पुरे नवाशाः (१०९) । १०६ ।
(३०) जबलपुर का ९३ कला पूर्व तथा १३९५ कला उत्तर है । (३१) चेन्नपुर
या चन्द्र पुर का ९७ कला पूर्व और ७८४ कला उत्तर है । (३२) कृष्णा सागर
संगम का १०२ कला पूर्व तथा ९५० कला उत्तर है । (३३) रायपुर का १०९ कला
पूर्व तथा
गोऽगारुणा (१२६९) राजमहेन्द्र पूर्या (३४)
रुद्रेन्दवो (१११) द्विद्विदिशः (१०२२) प्रयागे (३५)
चन्द्रेश्वराः (१११) खाक्षिशरेन्दव (१५२०) श्चा
योध्यापुरे (३६) रत्नपुरे (३७) ऽर्थ रुद्राः (११५) । १०७ ।
१२६९ कला उत्तर है । (३४) राजमहेन्द्री का १११ कला पूर्व तथा १०२२ कला
उत्तर है । (३५) प्रयाग १११ कला पूर्व तथा १५२० कला उत्तर है । (३६) अयोध्या
का ११५ कलापूर्व तथा (३७) रत्नपुर का भी ११५ कला पूर्व -
शराग्नभूपा (१६०५) क्षकलाः षडंग
विश्वे (१३६६) ऽथ गोदावरी सिन्धुसंगे (३८)
घनेन्दवो (११७) ऽङ्गाभ्र दिशो (१००६) ऽथ काश्यां (३९ )
सिद्धेन्दवो (१२४) ऽद्रीन्दुशरेन्दु (१५१७) संख्याः । १०८ ।
(३६) अयोध्या का अक्षकला १६०५ उत्तर तथा (३७) रत्नपुर का १३६६ कला
उत्तर है । (३८) गोदावरी सागर संगम का ११७ कला पूर्व तथा १००६ कला उत्तर
है । (३९) काशी का १२४ कला पूर्व तथा १५१७ कला उत्तर है ।
अथोदिता रायगढे (४०) ऽद्रिसूर्या (१२७)
नागाग्निविश्वे (१३०८) ऽथविशाख पुर्याम् । (४१)
नागारुणा (१२७) द्व्यंगदिशः (१०६२) समल्ल-
पुरे (४२) खविश्वे (१३०) त्रिगजाक्षि चन्द्राः (१२८३) । १०९ ।
(४०) रायगढ़ का १२७ कला पूर्व तथा १३०८ कला उत्तर है । (४१ )
विशाखापत्तन का १२७ कला पूर्व तथा १०६२ कला उत्तर है । ( ४२) सम्वलपुर
का १३० कला पूर्व तथा १२८३ कला उत्तर है ।
श्रीकाकुले (४३) रामगुणौ षधीशाः (१३३)
समुद्रनन्दाम्बर शीतभासः (१०९४)
नेपालमध्ये (४४) कृतरामरूपा (१३४)
स्यष्टाष्टभूपा (१६८८) श्व महेन्द्रशैले (४५) । ११० ।
(४३) श्रीकाकुलम का १३३ कला पूर्व तथा १०९४ कला उत्तर (४४) नेपाल
मध्य का १३४ कलापूर्व तथा १६८८ कला उत्तर है । (४५) महेन्द्र गिरिका