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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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उपसंहार वर्णन् ४४५
(१५) उज्जियिनी का ५० कलापूर्व तथा १३९० कला उत्तर है । (१६ ) मध्यदेश
में विन्ध्याचल का ५२ कला पूर्व तथा १३५० कला उत्तर है । (१७) कुरुक्षेत्र का
५६ कला पूर्व तथा १७९० कला उत्तर है ।
श्रीरंग के (१८) द्व्यंगमिता (६२) द्विवेदा
द्वयो (७४२)ऽर्थषट्का (६५) नगरामशैलाः (७३७)
कर्णाटके (१९) ऽथो गजसाह्वये (२०) ऽङ्ग
षट्का (६६) नगक्ष्माद्रि भुवः (१७१७) प्रदिष्टाः । १०२ ।
(१८) श्रीरंग (पट्टन) का ६२ कला पूर्व तथा ७४२ कला उत्तर है । (१९)
कर्नाटक का ६५ कलापूर्व तथा ७३७ कला उत्तर है । (२०) गाजियाबाद का ६६
कला पूर्व तथा १७१७ कला उत्तर है । ( दिल्ली के पास उत्तर प्रदेश में)
कुमारिका नामनि चान्तरीपे (२१)
गजर्तवो (६८) नाग भुजाब्धि (४२८) संख्याः
भूपालके (२२) नन्दशराः (६९) खखेन्द्राः (१४००)
ब्रजे (२३) खशैलाः (७०) खरसांग चन्द्राः (१६६०) । १०३ ।
(२१) कन्याकुमारी अन्तरीप का ६८ कला पूर्व तथा ४२८ कला उत्तर है ।
(२२) भोपाल का ६९ कला पूर्व तथा १४०० कला उत्तर है । (२३) ब्रज का ७०
कला पूर्व तथा १६६० कला उत्तर है ।
आग्रापुरे (२४) वेदनगः (७४) कुराम
भूपाश्च (१६३१) काञ्च्या (२५) त्रिगजाः (८३) खषट् षट् (६६०)
श्री वेंकटे (२६) खाष्ट (८०) नभोऽष्टशैला (७८०)
रामेश्वरे (२७)ऽगोष्ट (८७) रसार्थ बाणाः (५५६) । १०४ ।
(२४) आगरा का ७४ कला पूर्व तथा १६३१ कला उत्तर है । (२५) काञ्ची
पुरी का ८३ कला पूर्व तथा ६६० कला उत्तर है । (२६) श्रीवेंकट (तिरुपति) का
८० कला पूर्व तथा ७८० कला उत्तर है । (२७) रामेश्वरम् का ८७ कला पूर्व
तथा ५५६ कला उत्तर है ।
तद्द्वाविड़े (२८)ऽद्व्यष्ट (८७) खषट्क षट्काः (६६०)
बुन्देल के (२९)ऽगोष्ठ (८७) खखार्थ चन्द्राः (१५००)
श्रीनर्मदा सौम्यतटे जबल्लपुरे (३०) तथा भारतवर्ष मध्ये । १०५ ।
(२८) द्राविड़ मध्य का ८७ कला पूर्व तथा ६६० कला उत्तर है । (२९)
बुन्देलखण्ड का ८७ कला पूर्व तथा १५०० कला उत्तर है । (३०) भारत वर्ष के
मध्य में तथा श्रीनर्मदा के उत्तरी तट पर स्थित जबलपुर का
त्र्यंका (९३) शरांगाग्नि भुवो (१३९५)ऽथ चेन्न
(३१) पुर्यां नगांकाः (९७) कृतनागशैलाः (७८४)