सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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तथा (५) जलालाबाद का उत्तर अक्षकला क्रमशः (१-१२९४), (२-१३७१),
(३-१४२८), (४-१६४३), तथा (५-२०६७) है ।
आकेन्द्रमेतत् समसूत्र निष्ठ भूमौ न देशान्तर संस्कृति स्यात्
प्राग् भूविभागे खलु गुर्जराष्ट्रे (६) देशान्तरं बाण मिता विनाड्यः । ९७ ।
ये ५ स्थान पृथ्वी के केन्द्र से एक ही उत्तर दक्षिण वृत्त या देशान्तर रेखा पर
स्थित है । अतः इन स्थानों का देशान्तर संस्कार नहीं किया जाता है । यहां पर
उज्जैन के बदले जूनागढ आदि से गुजरती देशान्तर रेखा से दूरी कही गयी है) ।
इस रेखा के पूर्व भाग में गुजरात (६) का देशान्तर ५ कला है ।
तत्राक्षलिप्ता शरदन्त चन्द्राः (१३२५)
ऊनापुरे (७) ऽश्वाः (७) शरबाण सूर्याः (१२५५)
श्रीनर्मदा तोयधि संगमे (८) ऽक्षि
पक्षाः (२२) खशून्यज्वलनौषधीशाः (१३००) । ९८ ।
(६) गुजरात की अक्षकला उत्तर (१३२५) है । (७) उनापुर का देशान्तर (७)
पूर्व तथा अक्षकला (१२५५) उत्तर है । (८) नर्मदा सागर संगम का देशान्तर (२२
कला पूर्व) तथा अक्षकला (१३०० उत्तर ) है ।
बोम्बायिपुर्यां (९) त्रिभुजा (२३) नगाग्नी
शा (११३७) श्रोदया रूयानपुरे (१०) खरामाः (३०)
खाद्रयब्धि चन्द्रा (१४७०) अथ षट्क् रामा (३६)
लाहोर के (११) पूर्ण खनन्द चन्द्राः (१९००) । ९९ ।
(९) बम्बई का (२३ कलापूर्व) तथा ११३७ कला उत्तर है । (१०) उदयपुर
का ३० कलापूर्व तथा १४७० कला उत्तर है (११) लाहौर का (३६ कला पूर्व) तथा
१९०० कला उत्तर है ।
काश्मीरज श्रीनगर (१२) त्रिवेदा (४३)
रामाशुगव्योम विलोचनानि (२०५३)
जम्बां (१३) त्रिवेदो (४३) द्विशरांकचन्द्रा (१९५२)
वस्वब्धयः (४८) खाक्षिनृपा (१६२०) जयादौ । १०० ।
(१२) कश्मीर के श्रीनगर का ४३ कला पूर्व तथा २०५३ कला उत्तर है ।
(१३) जम्मू का ४३ कला पूर्व तथा १९५२ कला उत्तर है । (१४) जयपुर का ४८
कला पूर्व तथा १६२० कला उत्तर है ।
पुर्यु (१४) ज्ञयिन्यां (१५) खशरा (५०) खनन्द
विश्वे (१३९०) ऽथ विन्ध्याचल मध्य देशे (१६)
द्युर्थाः (५२) खबाणाग्नि भुवः (१३५०) कुरुणां
क्षेत्रे (१७) रसार्था (५६) खनवाद्रि चन्द्राः (१७९०) । १०१ ।