सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउपसंहार वर्णन् ४४३
केचित्पठिष्यन्त्युप संहृतिं तदुद्देशतो भूरिपदार्थ जातम्
मयोदितं राजकुमार कादेर्वेदांगपाठोत्थ फलाय सौख्यात् । ९२ ।
कोई कोई पूरा ग्रन्थ न पढ़कर केवल उपसंहार ही पढ़ते हैं । सुकुमार मति
राजकुमार आदि धनाढ्य लोग सहज से ही वेद की आंख रुपी ज्योतिष तथा
उसका फल जान पायें इसके लिये उपसंहार में सभी विषय संक्षेप में कहा गया
है ।
दिग् देश कालावगतिः प्रकाशात् स्यात् सप्तमादेव तथापि धीरा
न लोक सिद्ध स्थल बोध हीना ग्रहादि संदर्शयितुं यदीशाः । ९३ ।
सप्तम प्रकाश में दिग्, स्थान और काल आदि के विषयों में विस्तार से कहा
गया है । तथापि संसार में प्रसिद्ध सभी स्थानों को पण्डित लोग भी नहीं जान
पाते हैं । अतः कहां पर कब ग्रहण आदि होगा यह बताने में वे असमर्थ हो जाते
हैं ।
प्रधान नगरेश्वतो धरणि मध्य रेखा पुरः
परान्त रवि नाड़िकाः पल कलाश्च वच्मि क्रमात्
यतो