सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 534, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ेंउपसंहार वर्णन् ४३७
लब्धि को स्फुट शुक्र में घटाने या जोड़ने से वह स्फुट शुक्र (इष्टवर्ष का) होगा
शुक्र वक्री होने पर सूर्य मध्यम गति और शुक्र स्फुट गति के योग को ५ से गुणा
कर २ से भाग देकर फल को शुक्र से घटाने पर स्फुट होगा ।
शनिः खरामा (३०) ब्द पुरोः यथासीत्
कि न्त्वात्स सूर्यान्तर लिप्तिकानाम्
खेनांश (१२०) युग्भिः शरवाजिराम (३७५)
लिप्ताभिराभिः पुनरत्र मेषात् । ५६ ।
शनि ३० वर्ष पूर्व जिस राशि अंश आदि में था इष्ट सौर वर्ष मास दिन
आदि में वही होगा । मध्यम सूर्य और स्फुट शनि की अन्तर कला को १२० से
भाग देकर फल को ३७५ कला में जोड़ेगे । योग को स्फुट शनि में जोड़ेगे ।
पञ्चर्क्ष संस्थे नख (२०) दिग (१०) श्व (७) दशा (१०)
नखां (२०) श संयोगवती भिरस्मिन्
तुलादि पञ्चर्क्ष गते तदंश (२०।१०।७।१०।२०