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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

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४३२ सिद्धान्त दर्पण
आदि से पहले के समान स्थूल इष्ट तिथि आदि हो जायेगा ।
इहोक्त तुंगान्तर पाक्षिका भ्यं स्यादंगकानां धन हानि वाम्यात्
भानान्त कर्कादि मृगादि मासधनर्णता स्यादपि वैपरीत्यात् । २९ ।
इस स्थूल तिथि आदि को सूक्ष्म करने के लिए तुंगान्तर और पाक्षिक दोनों
फलों से तिथि आदि में उल्टे क्रम से संस्कार (जोड़ या घटाव) करेंगे । नक्षत्रों
का यह संस्कार कर्क और मकर से आरम्भ कर ५-५ मासों में क्रमशः जोड़कर
या घटाकर विपरीत क्रम से होगा ।
ग्राह्येऽप्यमध्येत्वधिमास पातश्चेद् ग्राह्यमेवोत्तर मासिसर्वम् ।
रूपाद्रि रामा (३७२) स्तिथयोऽर्कवर्षे यद्यन्त पूर्तिसह षोडशांशाः । ३० ।
ग्राह्य मास और इष्ट मास के बीच अधिमास पड़ने से अधिमास के अगले
मास में तिथि आदि सभी ग्रहण किया जायेगा । इसका कारण एक सौर वर्ष में
(३७२-१/१६) चान्द्र दिन या तिथि होती हैं । (३७२।३।४५)
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