सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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अनुपम है । ब्रह्माण्ड का मेरु सुवर्णमय है, कृष्ण भी शरीर में सुवर्ण समान
पीताम्बर पहने है । इस प्रकार ब्रह्माण्ड समान ही उसके स्वामी हमारा शुभ करें ।
श्री जगन्नाथ स्य शिव साम्यम् -
भूते शो भूति भूमिर्भवज भय भरोद् भेद भेदिप्रभावो
भुवीन्द्र भोगाभरण पुर भी भावदो भूत भूतेः
भू भृद् भूमीन्द्र मौलि र्भूत वरकमलो गौर भाषेशभंग-
प्रभ्राजद् भाल भत्तिर्वृषभरणचणः सत्यदभ्राभिसन्धिः । २४ ।
कृष्ण भूत (प्राणियों) के प्रभु हैं । शिव भूत पिशाचों के । कृष्ण अणिमा आदि
विभूतियों के स्थान है, शिव भूति (भस्म या सम्पत्ति) के आश्रय स्थल । कृष्ण
संसार के कारण हुए भय (भवभीति) का नाश करने में प्रभाव शाली हैं । शिव
भूमि से निकले भयानक सर्पों को अपने शरीर से लिपटाये हैं । कृष्ण पर्वतराज
(नीलाचल) पर नील कमल के समान मुकुट रूप में विराजमान हैं । शिव पर्वत
राज (कैलाश) पर अपने मुकुट पर गंगा जल धारण किये हैं । कृष्ण का ललाट
खण्ड चन्द्र के समान उन्नत है, शिव ललाट पर खण्ड चन्द्र है । कृष्ण धर्म रूपी
वृषभ के रक्षक है अथवा वृषासुर के नाश कर्ता है । शिव वृषभ पर आरूढ़ हैं ।
कृष्ण का हृदय साधुओं के लिए अति खुला है । शिव का हृदय भाव दक्ष कन्या
सती के पास पूर्ण हुआ । कृष्ण कान्ति गौर वर्ण को नष्ट करती है अर्थात् काला
है, शिव गौर हैं । वे दोनों प्राणियों की उन्नति करें ।
श्री गौरी साम्यम्
सर्वराध्या सितक्ष्माधर परम यशोभूति विख्यात हेतू-
माता लोकस्य दृप्यन्मधुवध मुदिता दित्यगीत प्रशस्ति
पाता इण्डादि दैत्या भिभवन खर रुक् चन्द्रकान्तोत्तमांग
श्री रस्मान् सर्वदो मेश्वर उदित रतिः केलिकान्ताङ्गसंभृत् । २५ ।
लक्ष्मी पति विष्णु के लिये-सभी वस्तु देने वाले लक्ष्मीपति जगन्नाथ हमारी
रक्षा करें । वह लक्ष्मी को क्रीड़ा के लिए अपने शरीर पर धारण करते हैं । कृष्ण
से सदा अनुराग (सुगन्ध) निकलता है । वे मस्तक पर मोर पंख लगाते हैं । अति
उग्र प्रथम दैत्य हिरण्यकशिपु को मारने के लिये उन्होंने नखों आदि की शक्ति
दिखायी थी । मधु दैत्य को मारने पर देवताओं ने उनकी प्रशंसा की थी । वे १४
ब्रह्माण्ड बनाने वाले तथा सभी के पूज्य हैं । उनके कारण नीलाचल के यश
(सम्पत्ति) में वृद्धि हुयी है ।
गौरी के लिये -गौरी सभी की आराध्या, कैलाश की सभी यश सम्पत्ति का
कारण तथा लोकों की माता है । चण्ड आदि दैत्यों के को हराने के समय उनका
अत्यन्त तेज था । ईश्वर प्रति अति अनुराग के कारण उनके वाम अंग में स्थित
हुयी है । खण्डित चन्द्र से उनका (शिव का) मस्तक शोभा पाता है । उनका