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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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संवत्सरादि वर्णनम् ४०७
क्रम से होते हैं, जिस समय एक का दिन (६ सौर मास का ) उस समय दूसरे
की रात्रि होती है ।
स षष्ठि त्रिशताहोभि (३६०) स्तदब्दः सतु सावनैः
सम्मितः साङ्कदण्डाग्नि गोशक्राग्नि कुभि (१३१४९३१९) दिनैः । ६९ ।
इस प्रकार के ३६० दैव (या आसुर) दिनों का दिव्य वर्ष होता है। जिसमें
(१,३१,४९३१९) सावन दिन होते हैं ।
सौराब्दे रर्बुद गुणैः कृतदिक् चन्द्र वह्निभिः (३११०४०,००,००,००,०००)
सम्मितं ब्रह्मणो वर्षं पुरोक्तास्त दिनादयः । ७० ।
ब्रह्मा का वर्ष (३१,१०,४०,००,००,००,०००) सौर वर्ष होते हैं । ब्रह्मा के दिन
के बारे में कहा जा चुका है ।
मनूनां यत् पृथङ्मानं हरिवंशेऽस्तितद्रवेः ।
गत्याप्यशक्यमाने तुं लिखाभ्यार्षोक्ति गौरवात् । ७१ ।
हरिवंश में मनु का जो अलग मान दिया गया है वह सूर्य की गति से नहीं
निकाला जा सकता है । ऋषि वचन के प्रति सम्मान के कारण में उसे यहां लिख
रहा हूँ ।
यथा हरिवंशे-दिव्यमब्दं दश गुणमहोरात्रं मनोः स्मृतम्
अहोरात्रं दश गुणं मानवः पक्ष उच्यते । ७२ ।
हरिवंश पुराण के अनुसार -१० दिव्य वर्षों का मनु का एक अहोरात्र होता
है । १० मनु अहोरात्र का मनु का १ पक्ष होता है ।
पक्षो दस गुणो मासो मासै द्वादशभिर्गुणैः
ऋतुर्मनूनां संप्रोक्तः प्राज्ञैस्तत्वार्थ दर्शिभिः । ७३ ।
मनु के १० पक्षों का मनु मास, १२ मनु मास का मनु की एक ऋतु होती
है-ऐसा तत्त्व दर्शी ज्ञानियों ने कहा है ।
कालव्याप्ति र्बहुविधा श्रौत स्मार्त्तेषु कर्मसु
तत् शुद्धिश्च विवाहादौ . न्युक्ता स्मृत्युक्ति भावतः । ७४ ।
वैदिक और स्मार्त्त कर्मों में अनेक प्रकार का काल विभाग हैं । स्मृति में इस
प्रकार की काल व्यवस्था का वर्णन होने के कारण विवाह आदि में काल शुद्धि
की व्यवस्था यहां नहीं कही जा रही है ।
चन्द्रगत्यनुसारेण जलोल्लासान्महाम्बुधेः
गंगाद्यवृद्धि नियमः क्वाचित्कत्वादलेखिना । ७५ ।
चन्द्र गति के अनुसार महासागर का पानी ऊपर उठता है । अतः गंगा आदि
नदियों का पानी भी बढ़ता होगा । परन्तु यह विचार ठीक नहीं होने के कारण