सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| ४०६ | सिद्धान्त दर्पण |
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*आरम्भ में २-२ मास की वर्षा आदि ३ ऋतुएं होगी ।
अथ पञ्चविधाब्दानां रवि मध्यम सावनैः
दिनैर्मानानि कथ्यन्ते मध्य भुक्त्यनुसारतः । ६१ ।
रवि की मध्यम गति के अनुसार पांच प्रकार के वर्ष में मध्यम सावन दिनों
की संख्या कही जा रही है ।
द्व्यक्षिनाड् यधिकाब्ध्यर्थ रामा (३५४।२२) श्चान्द्राब्द वासराः
सैकनाड्यंक बाणाग्नि संख्या (३५९।१) नक्षत्र वर्ष जाः । ६२ ।
चान्द्र वर्ष में (३५४।२२) तथा नाक्षत्र वर्ष में (३५९।१) सावन दिन होते हैं ।
सावनाब्दस्य ते षष्ठि समन्वित शतत्रयम् । (३६०)
स पञ्च दण्ड रूपाङ्गवह्वयो (३६१।५) जैववर्ष जाः । ६३ ।
सावन वर्ष में (३६०।०) तथा बार्हस्पत्य वर्ष में (३६१।५) सावन दिन होते
हैं ।
सौराब्द वासराः पञ्चषष्ट्युत्तर शत त्रयम् । (३६५)
तिथिभिः (१५) क्ष्माग्निभि (३१) श्वैतैः (३१)
सिद्धै (२४) दण्डादिभिर्यतम् । ६४ ।
सौर वर्ष में ३६५।१५।३१।३१।२४ सावन दिन होते हैं ।
ऋक्षेण भगणं केचिदार्द्धं मासं प्रचक्षते ।
अष्ट दण्डोन नागाक्षि गुणासद् वर्ष वासराः । (३२७।५२) । ६५ ।
कुछ लोग चन्द्र भगण काल को नाक्षत्र मास कहते हैं । इस मत से नाक्षत्र
वर्ष (१२ नक्षत्र मासों में ) सावन दिन संख्या ३२७।५२ है ।
मनूनां राज्य कालोऽत्र मानवं मान मुच्यते ।
न पृथग् दिन मासादि नियमस्तत्र सम्मतः । ६६ ।
स्वायम्भुव आदि मनु प्रत्येक जितने दिन राज्य करते हैं, उस काल को मनु
कहा जाता है । इसमें अलग दिन, मास आदि की गणना नहीं है ।
चान्द्रो मासः पितृदिनं यतैः खांगगुणैः (३६०) समा
सावनैस्तद् प्रमाणं तद्द्वा पाग्नि रस दिग् दिनैः (१०,६३१) । ६७ ।
एक चान्द्र मास को ही पितरों का अहोरात्र कहा जाता है। इस प्रकार के ३६०
दिनों का पितृवर्ष होता है । एक पितृवर्ष में (१०,६३१) सावन दिन होते हैं ।
देवमानं यदेवैतदासुरं परिकीर्तितम्
सौराब्दस्तदहोरात्रो दिनरात्रिविपर्ययात् । ६८ ।
देवताओं और असुरों का मान बराबर है, पर उनका दिन और रात विपरीत